हे भारत के राम जगो ,मैं तुम्हे जगाने आया हू

Hi folks,

A very sensitive thing about me is that I am a bit too nationalist. I heard this awesome and mind-blowing poem sometime when India was at war with pakistan on Kargil. It was sung in the most beautiful and unique way by Aushutosh Rana. I am very poor at English thus I dont have the words to describe the kind of intensity this poem created on the stage. more than 40000 people were stunned and elevated during the entire course of this poem and though I was very young I felt it too. Was looking for this poem for a long time and luckily found it just today, so here it is at a more safer and reachable place for me.
The entire line should should be read in one go and then after a small pause the next line.
njoi

हे भारत के राम जगो ,मैं तुम्हे जगाने आया हू , सो धर्मो का धर्म एक ,बलिदान बताने आया हूं ,
सुनो हिमालय कैद हुआ है ,दुश्मन की जंजीरों में आज बता दो कितना पानी है भारत के वीरो में ,
कड़ी शत्रु की फौज द्वार पर आज तुम्हे पुकार रही , सोये सिंह जगो भारत के माता तुम्हे पुकार रही ,
रण की भेरी बज रही ,उठो घोर निंद्रा त्यागो , पहला शीश चढाने वाले ,माँ के वीर पुत्र जगो
बलिदानों के वज्र दंध पर, देश भक्त की ध्वजा जगे , और रण के कंकर पहने है ,वो राज सिंह की भुजा जगे II

अग्नि पंथ के पंथी जागो ,शीश हथेली पर धरकर , जागो रक्त ,भक्त लाल के ,जागो तन के सौदागर,
खप्पर वाली काली जागे ,जागे दुर्गा बर्बंडा , और रक्त बीज का रक्त चाटने वाली जागे चामुंडा ,
नर मुंडो की माला वाला ,जागे कपाली कैलाशी , रण की चंडी घर घर नाचे , मौत फिरे प्यासी प्यासी ,
रावन का वध स्वयं करूँगा ,कहने वाला राम जगे, और कौरव शेष न एक बचेगा ,कहने वाला श्याम जगे ,
परुशराम का परशु जगे ,रघुनन्दन का बन जगे , यदुनंदन का चक्र जगे ,अर्जुन का धनुष महान जगे ,
परुशराम का परशु जगे ,पोरुष परुस महान जगे , और सेल्यूकस को कसने वाला ,चन्द्रगुप्त बलवान जगे II

हठी हमीर जगे ,जिसने झुकना कभी न जाना , जगे पदमनी का जोहर ,जागे केशरिया बना ,
देशभक्त का जीवीत झन्डा , आजादी का दीवाना , और रक्त प्रताप का सिंह जागे ,वो हल्दी घाटी का राना
दक्खिन वाला जगे शिवाजी .,खून शाहजी का राना , मरने की हठ ठाना करते ,वीर मराठो के रजा ,
छत्र शाल बुंदेला जागे ,पंजाबी कृपान जगे, और दो दिन जिया शेर के माफिक ,वो टीपू सुलतान जगे ,
गर्वाहे का जगे मोर्चा ,जगे झाँसी की रानी , अहमदशाह जगे लखनऊ का ,जगे कुंवर सिंह बलिदानी ,
गर्वाहे का जगे मोर्चा ,पानीपत मैदान जगे , भगत सिंह की फांसी जगे ,राजगुरु के प्राण जगे II

जिसकी छोटी सी लकुटी से (बापू ),संगीने भी हार गयी हिटलर को जीता ,वे फौजे सात समुन्द्र पर गयी ,
उस लकुटि और लंगोटी वाले बापू का बलिदान जगे , ये भारत देश महान जगे ,ये भारत की संतान जगे ,
आजादी की दुल्हन को जो सबसे पहले चूम गया , स्वयं कफ़न की गाँठ बाँधकर,सातों भंवर घूम गया ,
उस सुभाष की शान जगे ,उस सुभाष की आन जगे , ये भारत देश महान जगे ,ये भारत की संतान जगे II

झोली लेकर मांग रहा हू ,कोई शीश दान दे दो , भारत का भैरव भूखा है , कोई प्राण दान दे दो ,
खड़ी म्रत्यु की दुल्हन कुवारी ,कोई ब्याह रचा लो , कोई मर्द अपने नाम की चूड़ी तो पहना दो ,
कौन वीर निज ह्र्युदयरक्त से इसकी मांग भरेगा , कौन कफ़न का पलंग बिछा कर ,उस पर शयन करेगा ,
ओ कश्मीर हड़पने वाले ,कन खोल कर सुनतें जाना , भारत के सर की कीमत तो ,सिर्फ सर है ,
कोहिनूर की कीमत चाहे पांच हज़ार दीनार है,
रण के खेतो में जब छायेगा अमर म्रय्तु का सन्नाटा , लाशो की जब रोटी होंगी ,और बारूदों का आटा ,
सन्न सन्न करतें तीर चलेंगे ,वो माझी के तन वाला , जो हमसे टकराएगा ,चूर चूर हो जायेगा ,
इस मिटटी को छूने वाला, मिटटी में मिल जायेगा ,
मैं घर घर मैं इन्कलाब की आग जलाने आया हू , हे भारत के राम जगो ,मैं तुम्हे जगाने आया हूं , हे भारत के राम जगो ,मैं तुम्हे जगाने आया हूं II

जय भारत !!! जय हिंद !!!

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About Avi Dullu
Jaako rakhe saiyan, maar sake na koi!

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